बीकानेर में घुमने की जगह , bikaner me ghumne ki jagah
बीकानेर शहर में घुमने की बात करे तो
सबसे पहले ख्याल आता है जुना गढ़ का किला जिसे 16 वि सदी में बनाया गया था | इस
किले में एक संगहालय है जिसमे सदियों पुराने चित्र है बिकने में और भी कई घुमने की
जगहे है |
बीकानेर में देखने लायक जगहें
जूनागढ़ किला
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| JUNAGARH FORT BIKANER |
इसे महाराजा राय सिंह ने बनवाया था। ये एक एतिहासिक किला है इसलिए सैलानी इसकी ओर बहुत आकर्षित होते हैं। यह किला पूरी तरह से थार रेगिस्तान के लाल बलुआ पत्थरों से बना है। हालांकि इसके भीतर संगमरमर का काम किया गया है। इस किले में देखने लायक कई शानदार चीजे़ं हैं।
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| JUNAGARH KILA BIKANER |
यहां राजा की समृद्ध विरासत के साथ उनकी कई
हवेलियां और कई मंदिर भी हैं। यहां के कुछ महलों में गंगा महल, फूल महल, बादल महल आदि शामिल हैं। इस किले में एक संग्रहालय भी है जिसमें
ऐतिहासिक महत्व के कपड़े, चित्र और हथियार भी हैं। यह संग्रहालय सैलानियों के लिए राजस्थान के
खास आकर्षणों में से एक है। यहां आपको संस्कृत और फारसी में लिखी गई कई
पांडुलिपियां भी मिल जाएंगी। इसलिए अगर आप इस ओर आएं तो इन अलग अलग महलों को जरुर
देखें। जूनागढ़ किले के अंदर बना यह किला संग्रहालय बीकानेर और राजस्थान में
सैलानियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है। इस किला संग्रहालय में कुछ बहुत ही दुर्लभ
चित्र, गहने, हथियार, पहले विश्व युद्ध के बाइप्लेन आदि हैैं।
यह किला बीकानेर रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर दूर
है जिसके लिए ऑटो और टेक्सी आसानी से मिल जाती है |
लालगढ़ पैलेस
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| LALAGARH PALACE |
लालगढ़ पैलेस बीकानेर और राजस्थान में
सैलानियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है। इसे बीकानेर के महाराजा ने 1902 में बनवाया था। इसकी मुगल, राजपूत और यूरोपीय शैली की वास्तुकला
सैलानियों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। आज के समय में यहां एक संग्रहालय, एक हेरिटेज होटल और एक लक्जरी होटल है। यह एक तीन मंजिला भवन है जो
पूरी तरह से लाल बलुआ पत्थरों से बना है, जिससे यह पैलेस और आकर्षक लगता है। इसके
शानदार खंबे इसे और भी सुंदर और मनमोहक बनाते हैं।
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| LALAGARH PALACE BIKANER |
बीकानेर जाने पर लालगढ़ पैलेस
देखने से चूकना नहीं चाहिए।लालगढ़ पेलेस रेलवे
स्टेशन से 12 किलोमीटर दूर है जिसके लिए ऑटो और टेक्सी आसानी से मिल जाती है |
उंट प्रजनन फार्म
यहां एशिया में अपने आप में अनूठा उंट
प्रजनन फार्म है, जिसका प्रबंधन भारत सरकार करती है। बीकानेर शहर से कुछ किलोमीटर की
दूरी पर स्थित यह फार्म सैलानियों के लिए एक बड़ा आकर्षण है। एशिया में अपने आप
में एकमात्र इस फार्म में दुनिया में सबसे तेज चलने वाले उंट पैदा होते हैं।
शिव बाड़ी मंदिर
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| SHIV WADI MANDIR BIKANER |
शिव बाड़ी मंदिर बीकानेर का एक और मशहूर
आकर्षण है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी दीवारें बहुत उंची हैं। इस
मंदिर का निर्माण महाराजा डूंगर सिंह ने 9वीं सदी में करवाया था। स्थानीय लोग इस
मंदिर में कई तरह के धार्मिक रिवाज़ और परंपराएं निभाते हैं। यह मंदिर राजस्थान की
वास्तुकला के अनूठे प्रभाव को दिखाता है। पूरी तरह से लाल बलुआ पत्थरों से बने इस
मंदिर की वास्तुकला बहुत भव्य है। यहां आपको इस जगह की संस्कृति को दिखाते लघु
चित्रों का शानदार संग्रह मिलता है। यदि आप बीकानेर जाएं तो आप इस खूबसूरत और
अद्भुत मंदिर को जरुर देखें।
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| SHIV VARI MANDIR BIKANER |
प्राचीन संग्रहालय
प्राचीन संग्रहालय की स्थापना महाराजा
की बेटी ने की थी। इसकी स्थापना 2000
में की गई थी। कला और शिल्प में रुचि
रखने वालों के लिए बीकानेर के प्राचीन संग्रहालय का खास महत्व है। कई तरह के
कलाकारों को यहां अपना कौशल दिखाने का मौका मिलता है।
प्राचीन संग्रहालय बीकानेर के जूनागढ़
किले में स्थित है। प्राचीन संग्रहालय में शानदार शाही कपड़े और सामान प्रदर्शित
किया गया है। इसके अलावा संग्रहालय में पुराने सामान की पुरानी सेटिंग के साथ
राजाओं के परिवार के चित्र भी हैं। आधुनिक बीकानेर का हिस्सा रही विरासत की झलक भी
बहुत अच्छी तरह से इस संग्रहालय में दिखती है। यहां शाही कपड़ों, गहनों, धार्मिक सामान का बेहतरीन संग्रह मौजूद है। इसके अलावा यहां शिल्प, लेख और प्राचीन कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गईं हैं। महिलाओं के
पारंपरिक कपड़े भी यहां प्रदर्शित किए गए हैं।
गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय
गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय की स्थापना
सन् 1937 में महाराजा गंगासिंह ने की थी। यह एक
ऐसा संग्रहालय है जिसमें इतिहास, कलाकृति और यहां तक कि मूर्तियों का भी
अद्भुत संग्रह है। यह लालगढ़ पैलेस में स्थित है। इस संग्रहालय में कई हिस्से हैं
और ये ऐतिहासिक महत्व और हाइरार्की के हिसाब से बंटे हैं। यहां आपको हड़प्पा काल
की मूर्तियां, ब्रिटिश साम्राज्य के लिथो प्रिंट और कई सामान मिल जाएंगे। दुनिया के
हर कोने से इस संग्रहालय को देखने सैलानी ंिखंचे चले आते हैं। यह संग्रहालय
शुक्रवार और सार्वजनिक छुट्टियां छोड़कर हर दिन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है।
सादुल संग्रहालय
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| SADUL SANGRAHALAY |
सादुल संग्रहालय बीकानेर के लालगढ़ पैलेस की पहली मंजिल पर स्थित है। यह
संग्रहालय महामहिम डाॅ. कर्णिल सिंह से दान के रुप में मिला था। इस संग्रहालय की अध्यक्ष राजकुमारी राज्यश्री कुमारी हैं।
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| SADUL SABGRAHALAY |
यदि
आप यह संग्रहालय देखने आएं तो आप यहां बड़ी संख्या में जाॅर्जियाई चित्र, दुर्लभ कलाकृतियां और शिकार ट्राॅफियां पाएंगे। यहां के 20 से ज्यादा कमरों में आदमकद चित्र और तस्वीरें रखी हैं। वास्तव में
बीकानेर का शाही परिवार अब भी महल के एक हिस्से में रहता है। यह भी एक कारण है कि
लाखों लोग इस जगह की ओर आकर्षित होते हैं। सादुल संग्रहालय देखने का सामान्य शुल्क
10 रुपये है। यह संग्रहालय बीकानेर के तीन राजाओं और कलाकृतियों को लेकर
उनके जुनून को समर्पित है।
गजनेर वन्यजीव अभयारण्य
बीकानेर का गजनेर वन्यजीव अभयारण्य
बीकानेर शहर से 32 किलोमीटर दूर स्थित है। इस जगह का ऐतिहासिक महत्व बहुत ज्यादा है।
पहले के दौर में बीकानेर का गजनेर वन्यजीव अभयारण्य शिकार के लिए बीकानेर के
महाराज की पसंदीदा जगह था।
इसी जगह महाराज ने कई सारे जंगली जानवरों का
शिकार किया। बीकानेर का गजनेर वन्यजीव अभयारण्य अब जंगली जानवरों के संरक्षण के
लिए इस्तेमाल होता है।
देशनोक मंदिर
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| DESHNOK CHUHO WALI MATA |
देशनोक मंदिर बीकानेर से 32 किलोमीटर दूर देशनोक गांव में स्थित है। इस मंदिर को कर्णी माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर से बहुत से मिथक और इतिहास जुड़ा है। यह मंदिर कर्णी माता को समर्पित है जिन्हें मां दुर्गा का अवतार माना जाता है। इस पूरे मंदिर की शैली बहुत अनूठी है और उच्च धार्मिक विश्वास और मान्यताओं को दिखाती है। इस मंदिर में चूहों को बहुत पवित्र माना जाता है और मंदिर में इनके आसानी से आने जाने के लिए खास छेद भी बनाए गए हैं। यहां के स्थानीय लोगों में और सैलानियों में मंदिर को बहुत पवित्र माना जाता है।
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| DESHNOK BIKANER |
लक्ष्मी नाथ मंदिर
लक्ष्मी नाथ मंदिर बीकानेर का सबसे
पुराना मंदिर है। यह 1488 ईस्वी में पाया गया था। इसे एक ऐतिहासिक
स्मारक माना जाता है और इसमें कई ऐतिहासिक विशेषताएं हैं। इस मंदिर में सबसे उम्दा
वास्तुकला है और यह उन दिनों के कारीगरों के कौशल को दिखाती है। इस मंदिर में
भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। दुनिया भर में इनके असंख्य भक्त
हैं। इस मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण बीकानेर आने वाले लोग इस
मंदिर में आने का मौका नहीं चूकते हैं।
कोट गेट
कोट गेट सैलानियों के लिए बीकानेर में
एक दिलचस्प जगह है। यहां का स्थानीय बाजार बहुत बड़ा आकर्षण है और खरीददारी के लिए
स्वर्ग माना जाता है। इस बाजार में कई अद्भुत कलाकृतियों के अलावा स्थानीय भोजन के
कई विकल्प भी मौजूद हैं। इसके अलावा इतिहास का एक हिस्सा होने के कारण यहां कई
हस्तशिल्प और दूसरी कलाओं के सामान भी हैं। यहां सैलानियों को उंट की खाल से बना
सामान, लघु चित्र, लकड़ी की नक्काशी, खादी का सामान और लज्ज़तदार व्यंजन भी
मिल जाएंगे। इसलिए अगर आप यहां आएं तो खरीददारी के अनूठे अनुभव के लिए इस शानदार
जगह पर आना ना भूलें।
भंडासर जैन मंदिर
भंडासर जैन मंदिर एक अमीर व्यापारी
भांडा शाह ने बनवाया था और यह मंदिर छठें जैन भगवान को समर्पित है। यहां का शानदार निर्माण सबसे पहले अपनी ओर ध्यान खींचता है। यह माना
जाता है कि इस मंदिर को गारे के बजाय घी के 40 बैरल से बनाया गया था। यह मंदिर बीकानेर
के सबसे पुराने मंदिर लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास स्थित है
यह पूरा मंदिर तीन मंजिलों में बंटा है
और लाल बलुआ पत्थरों और संगमरमर का बना है। इस मंदिर के भीतर की सजावट बहुत सुंदर
है इसमें आरसी का शानदार काम किया गया है। इस मंदिर के अंदर के भित्ति चित्र और
मूर्तियां भी बहुत दिलचस्प हैं। इस मंदिर को देखना आपके लिए एक दिलचस्प अनुभव
होगा।
जैन हवेली
रेत के टीलों का शहर बीकानेर, दूर तक फैला रेगिस्तान, शानदार महल और सुंदर हवेलियां राजस्थान
के गौरव का प्रतीक हैं। इस शहर में देश की कुछ सबसे शानदार हवेलियां मौजूद हैं।
संकरी गलियों में बड़े से आंगन से घिरा और लाल बलुआ पत्थरों से बना एक महलनुमा घर
यानि हवेली किसी को भी राजा रानी के इतिहास की ओर खींच ले जाती है।
बीकानेर पहुचने के लिए ट्रेन और बस
उपयुक्त है यहाँ देश के लगभग सभी हिस्सों के लिए ट्रेन उपलब्ध है बीकानेर में
घुमने का प्लान सर्दियों बनाना चाहिए ये स्थान राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में है
इसलिए यहाँ सामान्य से अधिक गर्मी पड़ती है |










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